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लिक्विड फंड्स की पूरी जानकारी

By Nivesh Gyan   27 मार्च

Category: Liquid Funds

लिक्विड फंड्स की पूरी जानकारी

क्या हैं लिक्विड फंड्स?

अपने नाम के मुताबिक लिक्विड फंड डेट मार्किट की ऐसी म्यूचुअल फंड स्कीम होती है जिसमें से आप ज़रूरत के मुताबिक जब चाहे अपनी रकम निकाल सकते हैं।

लिक्विड फंड कैसे काम करते हैं?

  • लिक्विड फंड डेट और पूंजी बाज़ार के ऐसे विकल्पों में निवेश करते हैं जिनकी मेच्योरिटी 91 दिन के अंदर हो जाती है।
  • क्योंकि ये फंड्स बांड मार्किट पर कभी कभी ट्रेड किये जाते है और निवेशक इन्हे मेच्योरिटी अवधि समाप्त होने तक अपने पास रखता है, ये फंड्स नियमित आय एवं ज़्यादा लिक्विडिटी देते है. साथ ही साथ इंटरेस्ट रेट के उतार चढ़ाव से बचाते है।
  • लिक्विड फंड्स में कोई लॉक-इन पीरियड नहीं होता।
  • लिक्विड फंड्स में पिछले दिन के नेट असेट वैल्यू यानी एनएवी का फ़ायदा मिलता है। किसी भी दिन दोपहर 2 बजे तक निवेश करने पर पिछले दिन के एनएवी के भाव पर युनिट्स अलॉट होती हैं।
  • किसी भी दिन दोपहर 3 बजे तक रिडेंपशन या निकासी करने पर उसी दिन के एनएवी के हिसाब से युनिट्स रिडीम होती हैं।
  • दोपहर 2 बजे तक 50,000 रुपये की रिडेम्पशन उसी दिन पूरी हो जाती है।
  • रिडेम्पशन करने पर मिली रकम अगले ही दिन बैंक खाते में आ जाती है।
  • लिक्विड फंड्स पर फंड हाउस कोई एंट्री या एग्ज़िट लोड नहीं लगाते।

क्यों करना चाहिए लिक्विड फंड्स में निवेश?

  • आपातकालीन फंड बनाने का अच्छा ज़रिया
  • सबसे कम उतार चढ़ाव, क्योंकि ये ऊंची क्रेडिट रेटिंग वाले इंस्टरूमेंट्स में ही पैसा लगाते हैं
  • डिफॉल्ट की संभावना नहीं क्योंकि पोर्टफोलियो बहुत जल्दी मेच्योर हो जाता है
  • बेहतर रिटर्न की वजह से ये बचत खाते से बढ़िया विकल्प
  • लिक्विड फंड्स में ग्रोथ और डिविडेंड विकल्प के साथ साप्ताहिक या मासिक पेआउट यानी भुगतान लेने की आज़ादी है। निवेशक लिक्विड फंड्स में निवेश कर शेयर बाज़ार में भी सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान के ज़रिये सही समय पर निवेश कर सकते हैं

लिक्विड फंड्स का टैक्स पर असर

होल्डिंग पीरियड आय व्यवहार टैक्स इम्प्लीकेशन
3 साल से कम शार्ट टर्म कैपिटल गेन निवेशक के आय ब्रैकेट (१०%, २०% या ३०%) के हिसाब से आमदनी मे जुड़ जाता है
तीन साल से ज़्यादा लॉन्ग टर्म कैपीटल गेन मूल मूल्य २०% इंडेक्सेशन फायदा