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आर्बिट्राज फंड्स: मार्किट के उतार चढ़ाव साबित होंगे फायदेमंद!

By Nivesh Gyan   15 मई

Category: Better Than FDs

क्या है आर्बिट्राज फंड्स?

आर्बिट्राज फंड्स इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स का ही एक प्रकार है जो कॅश / स्पॉट मार्किट एवं फ्यूचर्स / डेरिवेटिव्स मार्किट में मूल्यों में फर्क से निवेशक के लिए रिटर्न्स उत्पन्न करते है. आसान शब्दों में समझे तो ये ऐसे फंड्स होते है जो दोनों मार्केट्स में एक ही वक्त पर अलग चल रहे मूल्यों का लाभ उठाकर निवेशक के लिए फायदा उत्पन्न करते है

कैसे काम करते है आर्बिट्राज फंड्स?

  • ये फंड्स एक मार्केट में कम दाम पर खरीद कर दूसरे मार्किट में ज़्यादा दामों पर बेचने के सिद्धांत पर काम करता है. मान लीजिये एक कंपनी के स्टॉक का मूल्य कॅश मार्किट में रु ५०० है और फ्यूचर्स मार्किट में रु ५५०. ऐसे में, निवेशक यदि एक ही वक्त पर ये शेयर कॅश मार्किट से खरीद कर फ्यूचर्स मार्किट में बेच दे तो उसे रु ५0 / शेयर का लाभ होगा।
  • निर्धारित समय से पहले फंड छोड़ने पर 0.२५-०.५ % का मामूली अर्थदंड पहले ३-६ महीने में लगता है, जबकि बैंक एफ डी से समय से पहले निकासी लेने पर १% का अर्थदंड लगता है।
  • इन् फंड्स का प्रतिदान ३ चालू दिनों में हो सकता है।

कौन कर सकता है इन् फंड्स में निवेश?

  • जिन निवेशकों को बाजार में अपना पैसा मध्यम से लम्बी अवधि के लिए लगाना हो, उनके लिए ये फंड्स उत्तम है।
  • जिन निवेशकों की प्रवृति में बाजार में कम जोखिम उठाना हो, उनके लिए ये फंड्स अस्थिरता के समय में अ च्छे साबित हो सकते है. आर्बिट्राज का सबसे अनुकूल समय बाज़ार की अनिश्चितता के वक्त होता है।

क्यों करे इन् फंड्स में निवेश?

  • इस प्रकार के फंड्स बाजार में निरंतर अस्थिरता के समय में एक अच्छा विकल्प साबित होते है।
  • इन् फंड्स पर रिटर्न्स भी सेविंग्स अकाउंट के इन्वेस्टमेंट से ज़्यादा मिलेंगे. फण्ड मैनेजर इक्विटी के रिस्क की प्रतिरक्षा डेरिवेटिव्स में पैसा लगाकर करते है।

आर्बिट्राज फंड्स और टैक्सेशन

क्योंकि आर्बिट्राज फंड्स में इक्विटी का अनुपात ६५% से ज़्यादा होता है, इस लिए इन्हे इक्विटी फंड्स की तरह ही समझा जाता है। इन की होल्डिंग अवधि, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के उद्देश्य से, १वर्ष होती है।
 

होल्डिंग पीरियड आय व्यवहार टैक्स इम्प्लीकेशन
1 साल से कम शार्ट टर्म कैपिटल गेन १५%
एक साल से अधिक लॉन्ग टर्म कैपीटल गेन १०%, १ लाख से अधिक प्रॉफिट पर