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क्या आप रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं? सही निवेश कर अपना भविष्य सुरक्षित करें

By Nivesh Gyan   18 जनवरी

Category: Retirement Planning

भविष्य को देखा नहीं जा सकता लेकिन उसकी सही प्लैनिंग ज़रूर की जा सकती है। अगर वित्तीय प्लैनिंग सही नहीं हो, तो रिटायरमेंट की कल्पना से ही डर लगता है।

क्या रिटायरमेंट की बढ़िया प्लैनिंग संभव है – एक ऐसा वक्त जब हमारी आमदनी शून्य होगी लेकिन खर्चे या तो बढ़ चुके होंगे या उतने ही रहेंगे?

असल में ये काम उतना मुश्किल नहीं जितना लगता है। इन्सान रियायर होने के बाद भी पैसे की चिंता किए बिना पहले जैसे लाइफस्टाईल रख सकता है। बस ये समझने की ज़रूरत है कि रिटायरमेंट के लिए किया गया निवेश सिर्फ पेंशन फंड्स तक ही सीमित नहीं है। असल में म्यूचुअल फंड्स की बढ़िया स्कीम्स बाज़ार में आने से ऐसे ढेरों विकल्प खुल गए हैं जिनसे आपकी रिटर्न महंगाई दर से एक कदम आगे तो रहेगी ही, साथ ही आप लंबी अवधी में एक बड़ी रकम भी जोड़ सकेंगे।

रिटायरमेंट की वित्तीय प्लैनिंग कब शुरू करनी चाहिए?

जैसे ही आपकी आमदनी शुरू हो, बस तभी से आपको रिटायरमेंट की प्लैनिंग शुरू कर देनी चाहिए।

रिटायरमेंट फंड में निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • क्या व्यक्ति नौकरी पेशा है या उसका खुद का कारोबार है?
    नौकरी करने वाले ज़्यादातर लोगों के लिए इम्पलॉयज़ प्रोविडेंट फंड यानी ईपीएफ के रूप में रिटायरमेंट प्लैनिंग का एक विकल्प पहले से मौजूद रहता है। इसके तहत हर कर्मचारी को अपनी बेसिक इनकम का 12% रिटायरमेंट फंड यानी ईपीएफ औऱ फैमिली पेंशन फंड में हर महीने जमा कराना होता है।
    वहीं दूसरी तरफ अपना कारोबार चलाने वाले लोगों को अपनी रिटायरमेंट की प्लैनिंग खुद से करनी पड़ती है। यही वजह है कि इन लोगों को रिटायरमेंट प्लैनिंग के बारे में ज़्यादा सोचना चाहिए।
  • रिटायरमेंट में कितने साल बाकी हैं
  • रिटायरमेंट के समय ज़रूरत पड़ने वाली पूंजी का आकलन
  • रिस्क उठाने की क्षमता

इन सवालों के जवाब ढूंढने से आप अपने लिए बढ़िया और उपयुक्त निवेश चुन सकेंगे

अब अगला सवाल ये है कि निवेश कहां करना चाहिए?

बाज़ार में कई परंपरागत विकल्प जैसे पब्लिक प्रॉविडेंट फंड, नेश्नल सेविंग्स सर्टिफिकेट स्कीम, इम्पलॉयज़ प्रोविडेंट फंड और बीमा पॉलिसी मौजूद हैं। इन विक्लपों की दिक्कत ये है कि ये सब ज़्यादातर तकरीबन 8% की रिटर्न देते हैं। इस रिटर्न से ना तो महंगाई दर का असर खत्म होता है औऱ ना ही कोई बड़ी पूंजी जमा हो पाती है।

यहीं पर म्यूचुअल फंड्स निवेश के इन परंपरागत तरीकों से आगे निकल जाते हैं। म्यूचुअल फंड्स की बढ़िया रिटर्न से बड़ी रकम जमा होना औऱ महंगाई दर का असर खत्म तो खत्म होता ही है, बल्की इनमें निवेश का खर्च भी बहुत कम है।

म्यूचुअल फंड पेंशन प्लान जैसे निवेश के परंपरागत तरीकों से बेहतर क्यों है?

  • म्यूचुअल फंड्स में निवेश की शर्तें बेहद आसान हैं और आप अपनी सुविधा के हिसाब से इन्हें ढाल सकते हैं। साथ ही पैसे की ज़रूरत पड़ने पर आप तुरंत अपनी पूरी रक्म या जितनी ज़रूरत है, उतनी रकम म्यूचुअल फंड्स से बिना कोई जुर्माना दिए निकाल सकते हैं।
  • आपकी ज़रूरत और रिस्क उठाने की क्षमता के मुताबिक म्यूचुअल फंड्स की ढेरों स्कीम्स मौजूद हैं। ज़्यादा रिटर्न के लिए आप इक्विटी फंड्स में निवेश कर सकते हैं, नियमित आमदनी के लिए आप डेट फंड्स या फिर अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए आप गोल्ड फंड्स में निवेश कर सकते हैं। रिस्क के पैमाने पर भी आप सुरक्षित या लिक्विड फंड, ज़्यादा रिस्क वाले सेक्टोरल फंड या फिर मध्यम रिस्क वाले हाईब्रिड फंड्स में निवेश कर सकते हैं।

म्युचुअल फंड निवेश के ज़रिये टैक्स बचत

टैक्स बचत के मामले में म्यूचुअल फंड्स एक बेहतर विक्लप हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पूरी तरह से टैक्स फ्री हैं। डेट म्यूचुअल फंड्स में इंड्क्सेशन से पहले 10% और इंड्क्सेशन के बाद 20% टैक्स की देनदारी होती है। इंड्क्सेशन वो प्रक्रिया है जिसके तहत फंड खरीदने से लेकर बेचने तक महंगाई दर का हिसाब किया जाता है। रिटायरमेंट के समय आप सिस्टेमेटिक तरीके से यानी हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड से निकाल सकते हैं। इससे टैक्स बचत में फायदा मिलता है। जबकी पेंशन को आपकी आमदनी माना जाता है औऱ ये पूरी तरह से टैक्स के दायरे में आती है।

मोटे तौर पर ये कहा जा सकता है कि अगर आप नियमित रूप से म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं, तो आप चिंता मुक्त हो कर, टैक्स की बचत करते हुए एक बड़ी रकम जमा कर सकेंगे।