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डेब्ट म्यूच्यूअल फंड्स के NAV लगातार क्यों गिर रहे है?

By Nivesh Gyan   20 मार्च

Category: General

पिछले एक सप्ताह हमने डेब्ट फंड्स की एनएवी में गिरावट देखी है जिससे कई  निवेशक हैरान है । फिर चाहे वे क्रेडिट रिस्क फंड हों या बैंकिंग और पीएसयू फंड सभी के NAV गिरे है। कई लोग आश्चर्यचकित है की ऐसा क्यों हो रहा है। डेट फंड की NAV कई कारणों से गिर सकता है। आईये जानते है l

डेब्ट फंड्स की NAV निम्न कारणों से घटती या बढ़ती है :

  • बांड द्वारा दिए गए ब्याज से जो की बांड्स की NAV को बढाती है 
  • बांड्स की औसत परिपक्वता समय  भी बांड्स की NAV के ऊपर या निचे जाने का कारण बनती है, जितना ज़्यादा बांड्स की औसत परिपक्वता होगी उतनी ही ज्यादा बांड्स मार्किट में चल रहे माँग और पूर्ति के बीच के अंतर से प्रभावित होंगे 
  • अगर पोर्टफोलियो में किसी बांड्स की क्रेडिट रेटिंग में कोई बदलाव हो जाता है

अभी की परिस्थिति 

अभी पुरे विश्व में फैले इस कोरोना वायरस की वजह से सभी डर के माहौल में जी रहे है जिसके कारण विकासशील मार्किट में विदेशी निवेशकों के द्वारा भारी बिकवाली हुई है जिससे बांड मार्किट भी बच नहीं पाया है और  FII ने भारतीय बांड्स भी बेचे है और इससे बांड्स की मांग और पूर्ति में भारी अंतर आ गया है जिससे बांड्स की कीमतों में गिरावट आयी है और उसके फलस्वरूप उनकी यील्ड में बढ़ोतरी देखी गयी है ,और जब भी बांड्स की माँग में कमी आती है उससे बांड्स की कीमतों में ही कमी आती है जिसके परिणाम स्वरुप बॉन्ड फंड्स की NAV भी कम होती है। यह NAV की गिरावट उन बांड्स में ज्यादा है  जिनकी परिपक्वता अधिक है क्योकि ऐसी स्थिति में अधिक मचुरिटी के पेपर ज़्यादा प्रभावित होते है। 

ऐसी परिस्थिति पहले भी आ चुकी है जो तब तक बनी रहती है जबतक चीजे सामान्य नहीं हो जाती और परिस्थिति सामान्य होने पर इनमे एक तेज रिकवरी होती है। 

नीतियाँ 

बॉन्ड मार्किट की स्थिति अभी बहुत ही अनुकूल है विश्वभर के सेंट्रल बैंक्स दरों में कटौती कर रही है जो की बॉन्ड मार्किट के लिए अच्छी है , भारी बिकवाली के कारण जो यील्ड में बढ़ोतरी  देखि गयी है उससे नए निवेशकों के लिए एक बेहतर विकल्प है 

निवेशक क्या करें ?

  • अभी की परिस्थितियों को देखते हुए निवेशक को चाहिए की वो अपने वर्तमान पोर्टफोलियो को लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स में स्विच कर सकते है और एक बार मार्किट में स्थिति सामान्य होती है तो वह पुनः अपने फंड्स में वापसी कर सकते है 
  • जिन निवेशकों के  निवेश की समय अवधि लम्बी थी वो अपनी यथास्थिति बनाये रख सकते है.

प्रभावित फंड्स 

Medium-term Debt Fund, Credit Risk Fund, Banking & PSU Funds, low Duration Funds, और प्रत्येक फंड जिसके पोर्टफोलियो 1 वर्ष से अधिक के परिपक़्वता का  पेपर है