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क्या कोरोनावायरस सच में बाजार को प्रभावित करेगा ?

By Nivesh Gyan   3 मार्च

Category: General

भारतीय बाजारों सहित COVID-19 के प्रकोप से वैश्विक स्तर पर बाजार दबाव में हैं।

हालांकि, हमें प्रभाव के अपने आकलन में उद्देश्य पूर्ण होने की आवश्यकता है, खासकर अगर हमने लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए निवेश किया है।
 

प्रकोप (वर्ष) भारतीय सूचकांक (Sensex) वैश्विक सूचकांक
1- महीना (%) 6 महीना (%) 1 महीना (%) 6 महीना (%)
SARS (Apr-2003) -7.89 37.9 8.64 21.5
AVLAN (H5N1) (June-06) -6.39 26.97 -0.18 10
Cholera (Nov-10) -8.39 -6.28 -2.35 13.61
MERS (May-13) -5.13 1 -0.29 8.58
RUBEOLA (Dec-14) -4.16 -3.2 -1.71 2.29
ZIKA (Jan-16) -6.81 3.38 -6.05 -0.57
Corona Virus -7
Source: Economic Times

 

मौजूदा स्थिति :

 

  • जैसा कि हमने उपरोक्त तालिका में चर्चा की है कि पिछले बाजार में सबसे घातक प्रकोप के दौरान अल्पावधि में बाजार में थोड़ी गिरावट देखने को मिली , लेकिन उसके बाद बाजार ने अच्छी वापसी की। 
  • चीन का सूचकांक ने सकारात्मक रिटर्न दिया है जो दर्शाता है कि वहां सब कुछ सामान्य हो रहा है। 
  • चीन में संक्रमित लोगों की संख्या कमी आने लगी है। 
  • Apple कंपनी ने घोषणा की  है कि वे चीन में अपने 85% स्टोर्स में कार्यकलाप फिर से शुरू कर रहे हैं।

भारतीय बाजार के लिए फायदे :

 

  • कच्चे तेल की कीमतें 68 डॉलर से 50 डॉलर के स्तर पे आ गयी हैं, यह भारत जैसे देश के लिए बहुत अच्छी बात है जहां तेल के आयात पर बहुत अधिक डॉलर खर्च किए जाते हैं।
  • हम चीन के साथ एक बड़ा व्यापार घाटा चला रहे हैं (आधिकारिक रूप से $ 50 अरब डॉलर) जो कि आयात में कमी आने के कारण घट जाएगा। इसके अतिरिक्त, हम चीन से कुछ अनावश्यक वस्तुओं का आयात कर रहे थे, जिनका हम भारत में भी निर्माण कर सकते है । जो भारत के स्थानीय निर्माताओं के लिए फ़ायदेमंद साबित होगा।
  • भारत, 65% अमेरिकी कंपनियों (3000 कम्पनियो का सर्वेक्षण ) के लिए माल को आउटसोर्स करने के लिए दूसरा सबसे पसंदीदा देश है, जो भारत के लिए विकास के अवसरों  को दर्शाता है।
  • भारत कोरोनोवायरस के कारण चीन से उत्पन्न होने वाली आपूर्ति समस्या को अपने लिए एक अवसर की तरह देख सकता है। 
  • कोरोनावायरस के कारण, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल फोन, फार्मास्युटिकल जैसी कुछ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होगी, जैसा कि  हम जानते हैं कि भारत दवा के शीर्ष निर्यातकों में से एक है
  • कुछ उद्योग जो कि कच्चे तेल पर निर्भर है जैसे कि,विमानन, शिपिंग, सड़क, और रेल परिवहन, कोरोनोवायरस के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक गिरावट से इनको लाभ होने की संभावना है।
  • उपभोक्ता महंगाई दर  इस प्रकोप से प्रभावित नहीं है क्योंकि अधिकांश मुद्रास्फीति खाद्य की कीमतों की वजह से आ रही है जहाँ  कोरोनवायरस का कोई प्रभाव नहीं है। 
  • कोरोनोवायरस के कारण मूल्य वृद्धि उन लाभों की तुलना में बहुत कम है जो हमे कच्चे तेल की कम कीमतों के रूप में मिल रही है। 
  • वैश्विक स्तर पे ब्याज दरें कम रहेंगी जिसका फायदा सभी इक्विटी मार्किट को होगा ।
  •  रिज़र्व बैंक लगातार अर्थवयवस्था में पैसा डाल रहा है और ब्याज दरे भी कम रख रहा है जिससे पूंजी की उपलब्धता बनी रहे। और साथ ही जापान और अमेरिकन फ़ेडरल रिज़र्व भी दरों में कटौती कर रहा है ताकि पूंजी की उपलब्धता में वृद्धि हो।

अगर निवेशक बाजार में तनाव की स्थिति में भी निवेश करते रहते हैं तो उन्हें अच्छा रिटर्न मिलता है। ये समय भी बीत जाएगा। हमारा सुझाव है की धन संचय  के लिए आप अपनी दीर्घकालिक निवेश रणनीति के साथ बने रहे है।