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सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान और इसका टैक्स पर असर की पूरी जानकारी

By Nivesh Gyan   17 दिसम्बर

Category: Build Wealth

क्या आप इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में एकमुश्त बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रहे हैं? जानकारों की राय में म्यूचुअल फंड्स में एक साथ बड़ी रकम नहीं लगानी चाहिए। तो क्या हैं हमारे विकल्प?
 
सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान उन निवेशकों के लिए बना है जो लंबी अवधी के लिए म्यूचुअल फंड्स में बड़ा निवेश कर सकते हैं और जो जोखिम और रिटर्न के बीच बढ़िया संतुलन बना कर चलना चाहते हैं।

आखिर सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान है क्या?

सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान के तहत आपकी रकम को समय समय पर एक म्यूचुअल फंड से दूसरे में ट्रांसफर करते रहते हैं – ज़्यादातर डेट म्यूचुअल फंड से इक्विटी म्यूचुअल फंड में। हालांकि ऐसा तभी मुमकिन है जब दोनों म्यूचुअल फंड एक ही फंड हाऊस के हैं। ये सिद्ध किया जा चुका है कि म्यूचुअल फंड्स में लगातार सिस्टेमैटिक तरीके से थोड़ा थोड़ा निवेश एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बेहतर रहता है। सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान से आपको यही फायदा एक ही बार में पूरी रकम निवेश कर के भी मिल जाता है।

कैसे हैं सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान फ़ायदेमंद

इन फंड्स में निवेश से आपको दोहरा फ़ायदा मिलता है
 
जहां एक तरफ आप इक्विटी फंड्स में सिस्टेमैटिक निवेश कर बढ़िया रिटर्न्स ले सकते हैं, वहीं डेट फंड्स में रखे पैसे पर आपको बैंक एफडी से ज़्यादा रिटर्न मिलेगा।

सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान काम कैसे करते हैं?

मान लीजिए आपके पास निवेश के लिए 6 लाख रुपये मौजूद हैं। आइये समझते हैं आप सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान के ज़रिये कैसे इनका निवेश कर सकते हैं:

  • सबसे पहले डेट या लिक्विड शॉर्ट टर्म फंड का चुनाव करें (सुनिश्चित करें कि फंड पर कोई एग्ज़िट लोड ना हो)
  • अब आप इक्विटी फंड में पूरी रकम के निवेश की अवधी तय करें। रकम के आधार पर ये अवधी 1 महीने से लेकर 1-2 साल तक हो सकती है।
  • ट्रांसफर की आवृत्ति तय करें यानी कितनी जल्दी आप अपनी रकम एक फंड से दूसरे में ट्रांसफर करना चाहेंगे – मसलन हर रोज़, साप्ताहिक, मासिक या फिर तिमाही (हमारी नज़र में साप्ताहिक विकल्प सबसे बेहतर है)

सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान का टैक्सेशन पर असर

सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान का टैक्स पर पड़ने वाले असर को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान में डेट फंड से होने वाली हर ट्रांसफर को रिडेंप्शन माना जाता है, इसलिए डेट फंड पर मिलने वाली रिटर्न पर आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। अगर आप डेट फंड्स को 3 साल से पहले बेच देते हैं, तो भी इन्हें शॉर्ट टर्म गेन माना जाएगा और आपके आयकर स्लैब के मुताबिक इन पर टैक्स की देनदारी बनेगी। हालांकि बैंक एफडी या बचत खाते में टैक्स की दर समान रहती है।
 
टैक्स की देनदारी के बावजूद सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान में एक मुश्त निवेश कर के भी आप इक्विटी फंड्स में सिस्टेमेटिक निवेश का फायदा उठा सकते हैं।