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अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स से करें निवेश की छोटी सी पहल

By Nivesh Gyan   3 अप्रैल

Category: Better Than FDs

क्या हैं अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड?

अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स ऐसे डेट फंड होते हैं जो सरकारी बॉन्ड्स जैसे फिक्सड इनकम विकल्पों में निवेश करते हैं। ये बहुत जल्दी मैच्योर हो जाते हैं और इनमें से रकम कभी भी निकाली जा सकती है।

कैसे काम करते हैं अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड

  • ये फंड मुख्य तौर पर कमर्शियल पेपर, ट्रेज़री बिल, सर्टीफिकेट ऑफ डिपॉज़िट और कॉर्पोरेट पेपर जैसे विकल्पों में निवेश करते हैं। आमतौर पर इन इंस्ट्रूमेंट्स की मेच्योरिटी 91 दिन से अधिक होती है।
  • इन्वेस्टमेंट मूलत: ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स मे किया जाता है जिनकी मेच्योरिटी अवधि १ हफ्ते से १८ महीने के बीच होती है।
  • ये फंड लिक्विड फंड्स जैसे होते हैं लेकिन इनकी मेच्योरिटी की अवधि लिक्विड फंड्स से लंबी होती है (जो फिनान्सिअल इंस्ट्रूमेंट्स में 91 दिन की मेच्योरिटी के लिए निवेश करते हैं)।
  • अल्ट्रा शार्ट डेब्ट फण्ड ज़्यादातर फण्ड में निहित डेब्ट इंस्ट्रूमेंट से मिले कूपन (इंटरेस्ट ) से अपनी आय कमाते है।
  • अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स पर आमतौर पर एग्ज़िट लोड नहीं लगता। हालांकि कुछ फंड 1 हफ्ते से 6 महीने की अवधि तक निकासी पर 0.25-0.5% का मामूली एग्ज़िट लोड लगाते हैं।

अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स में निवेश क्यों करना चाहिए?

  • ये नए निवेशकों और छोटी अवधि के लिए निवेश के इच्छुक निवेशकों के लिए बिलकुल सही विकल्प है।
  • लिक्विड फंड्स की अपेक्षा अल्ट्रा शार्ट टर्म फंड्स से ज़्यादा रिटर्न्स की उम्मीद की जा सकती है।
  • डायनैमिक इनकम फंड्स के मुकाबले इनमें उतार चढ़ाव की गुंजाइश ना के बराबर रहती है क्योंकि डायनैमिक इनकम फंड्स में अंर्तनिहित बॉन्डस का भाव रोज़ बदलता है।
  • अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स शेयर बाज़ार में निवेश करने के लिए बने सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान का सूत्र बन सकते हैं। जो निवेशक किसी इक्विटी फंड में एकमुश्त रकम तो लगाना चाहते हैं लेकिन एकसाथ पूरा निवेश नहीं करना चाहते, वो अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स में निवेश कर ये निर्देश दे सकते हैं कि हर महीने इन फंड्स में से एक सीमित राशी को निकाल कर इक्विटी फंड में लगा दिया जाए।

अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स का टैक्स पर असर

होल्डिंग पीरियड आय व्यवहार टैक्स इम्प्लीकेशन
3 साल से कम शार्ट टर्म कैपिटल गेन निवेशक के आय ब्रैकेट (१०%, २०% या ३०%) के हिसाब से आमदनी मे जुड़ जाता है
तीन साल से ज़्यादा लॉन्ग टर्म कैपीटल गेन मूल मूल्य २०% इंडेक्सेशन फायदा